यूगांडा में अब ब्रा बम का हौव्वा
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सम्मान का खुला अपमान करने पर तुली यूगांडा सरकार: संसद में लाया जा रहा है खुली तलाशी का विधेयक: सुरक्षा के नाम पर महिलाओं के गुप्तांगों की भी होगी तलाशी: यूगांडा में सीधे हाथ से तलाशी जाएगी महिलाओं की छाती पूरे महिला समाज के लिए कलंक बन जाएगा यूगांडाई संसद में आने वाला बेहूदा कानून
अगर इस समय यहां उगांडा में भारत के विजुअल मीडिया का कोई रिपोर्टर होता तो अपने देश के लिए खूब चटपटी खबर बनाता और उसे वहां के हिंदी चैनल पूरे दिन पूरी प्रमुखता से इसे चलाते रहते। मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह औरत के अपमान वाली खबर है, पर इसे विश्व भर की औरतों को जानना चाहिए। खबर है कि उगांडा की सरकार अपने संसद के इस आखिरी सत्र में एक बिल लाने जा रही है, जिसमें यहां के सुरक्षा अधिकारी औरतों के ब्रा को बाकायदा छूकर उसमें बम होने के संदेह की जांच कर सकेंगे। और इसके लिए जरुरी नहीं है कि हर जगह महिला सुरक्षा अधिकारी ही रहें। कोई भी सुरक्षा अधिकारी चाहे वह पुरुष हो या महिला, किसी भी औरत के ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर उसकी जांच कर सकता है।
सरकारी बिल में पुलिस और सुरक्षा के लिए काम करने वाले किसी भी अधिकारी को इसके लिए कानूनी रुप से जांच करने का अधिकार दिया जा रहा है। और इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसका इस देश में कोई पुरजोर विरोध नहीं हुआ है। महिलाओं के एक छोटे से संगठन ने जरूर आपत्ति उठाई है कि इसके लिए केवल महिला अधिकारी ही तैनात की जाएं। पर आम तौर पर यहां की औरतों ने भी इसे अपनी मौन स्वीकृति दे ही दी है।
जिस दिन से उगांडा की राजधानी कंपाला में अल शबाब के आतंकवादी संगठन ने तीन बड़े बम विस्फोट किए हैं, उसी दिन से सरकार सुरक्षा बढ़ाने के नाम पर कई कदम उठाने की बात करती रही है। और अब तो यहां चुनाव का मौसम आ गया है तो इस तरह की बातें करना सरकार के लिए जरुरत सी बन गई है। सरकारी तौर पर मीडिया को बताया गया है कि सरकारी खुफिया तंत्र के पास सूचना आई है कि आतंकवादियों ने अनेक ऐसी महिलाओं को तैयार कर लिया है जो अपने ब्रा में बम रखकर कहीं भी किसी आतंकी घटना को अंजाम दे सकती हैं। खासतौर से आने वाले चुनाव में अशांति फैलाने के लिए इसके उपयोग की बात की जा रही है। यहां अगले माह आम चुनाव होने वाले हैं और आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस बार इसे हिंसक बनाया जाएगा। पर यह बात केवल राजनीति की नहीं है।
पर सबसे ज्यादा चिंता की बात है कि अभीतक इसके लिए महिलाओं की ओर से कोई व्यापक विरोध भी नहीं किया गया है। वे आतंकियों से इतना डरी हुई हैं कि उन्हें किसी सुरक्षा अधिकारी से अपनी जांच कराने में भी कोई ज्यादा आपत्ति नहीं हो रही है। यह ठीक है कि उगांडा की पूरी संस्कृति हमारे आदिवासी इलाकों जैसी ही है। मैंने कुछ मुसलमान औरतों को छोड़कर किसी महिला को पूरे कपड़ों में नहीं देखा है। शरीर का 75 फीसदी हिस्सा खुला रहता है। कोई महिला किसी भी पुरुप के साथ आलिंगन करने में कोई परहेज नहीं करतीं। एक महिला दो और तीन पुरुप को भी अपना पति कहती हैं। उसी तरह कोई पुरुप आराम से दो और तीन महिलाओं के साथ रह सकता है। समाज इसपर कोई आपत्ति नहीं उठाता।
पर इससे सबसे ज्यादा नाराज यहां रहने वाली भारतीय मूल की महिलाए हैं। वे इस बात को कैसे स्वीकार कर सकती हैं कि कोई सुरक्षा अधिकारी उनके अंदर हाथ डाल दे। पर सुरक्षा के नाम पर पुलिस को दिए जा रहे अधिकार को वे चुनौती कैसे दें, यह अभी तक तय नहीं हो सका है। सरकार के पास इतने संसाधन भी नहीं हैं कि वह हर जगह महिला अधिकारियों की नियुक्ति कर सके।
अंचल सिन्हा
हिन्दी लेखन जगत के एक जानेमाने नाम हैं। हालांकि लेखन की दुनिया में आने के पहले वे बैंक अफसरी से लेकर दुनिया भर के कामों के हाथ आजमा चुके हैं।
आजकल उगांडा में बैंकिंग से जुड़े कामकाज के सिलसिले में डेरा डाले हुए हैं।उनका यह लेख भडास4मीडियाडॉटकाम से है।
