2007 में सीरियल ब्लास्ट के आरोपी तारिक कासमी को बाराबंकी कोर्ट ने दी उम्रकैद

रिज़वान मुस्तफा
बाराबंकी -अदालत ने 2007 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के आरोपी तारिक कासमी को आजीवन कारावास के साथ एक लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। ये सीरियल बम ब्लास्ट वाराणसी, फैजाबाद और लखनऊ में हुए थे। इसमें एसटीएफ ने तारिक काशमी और खालिद मुजाहिद नाम के दो युवकों को बाराबंकी के रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कि‍या था। उन पर सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल होने का आरोप था। साथ ही अवैध विस्फोटक पदार्थ बरामद कि‍ए गए थे।
शुक्रवार को बाराबंकी की अदालत ने तारिक कासमी को दोषी माना है। दूसरे आरोपी खालिद मुजाहिद की 18 मई 2013 को लखनऊ से फैजाबाद पेशी पर ले जाते समय बाराबंकी में मौत हो गई थी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की सेशन कोर्ट जज शांति‍ प्रकाश अरविंद ने यूपी के चर्चित लखनऊ, वाराणसी, फैजाबाद कचहरी सीरियल बम ब्लास्ट 2007 के आरोपी तारिक काशमी को दोषी करार दिया है। आईपीसी 4-5 विस्फोटक रखने के मामले में कोर्ट ने आजीवन कारावास और 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। दूसरी धारा 18-20-23 विधि विरुद्ध क्रियाकलाप मामले में भी आजीवन कारावास और 50,000 रुपए का अर्थदंड सुनाई है। इसके साथ-साथ धारा 353 IPC में दो साल की सजा साथ ही 50 हजार रुपए अदा नहीं करने पर भी अर्थदंड के तौर पर 10-10 महीने का अति‍रिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।
तारिक काशमी, मृतक खालिद मुजाहिद के अधिवक्ता और राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशदी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने निचली अदालत पर सरकार और प्रसासन का दबाव डालने का भी आरोप लगाया है। लंबे समय से इस मामले की सुनवाई बाराबंकी जिला जेल में विशेष कोर्ट बनाकर की जा रही थी। इस दौरान बाराबंकी जेल की सुरक्षा किले जैसी थी। जेल को चारों ओर से एसटीएफ ने घेर रखा था। शुक्रवार को ही तारिक को जिला जेल लखनऊ से बाराबंकी लाया गया था।
जानकारी के अनुसार, वाराणसी, लखनऊ और फैजाबाद की कोर्ट में 23 नवंबर 2007 में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। एसटीएफ का दावा है कि‍ इसके अभियुक्त हरकत-उल-जेहाद-अल इस्लामी (हूजी) के संदिग्ध आतंकवादी खालिद मुजाहिद और तारिक काशमी थे। उन्‍हें 22 दिसंबर 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था। उधर, आरोपी तारिक कासमी और राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशदी ने एसटीएफ पर गंभीर आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि‍ उत्पीड़न कर जबरन उन्‍हें आतंकवादी बनाया गया है।
23 मई 2007 को हुए थे धमाके
वाराणसी, लखनऊ और फैजाबाद की कोर्ट में 23 नवंबर 2007 में सीरियल बम धमाके हुए थे। मामले में हरकत-उल-जेहाद-अल इस्लामी (हूजी) के संदिग्ध आतंकवादी खालिद मुजाहिद और तारिक काशमी को गिरफ्तार किया गया था। इनमें से खालिद मुजाहिद की फैजाबाद की अदालत में पेशी से लौटते वक्त मौत हो गई थी।
गोरखपुर के गोलघर में भी हुए थे धमाके
गोरखपुर के गोलघर में 23 मई 2007 की शाम पांच-पांच मिनट के अंतराल पर तीन जगह सिलसिलेवार धमाके हुए थे। इसमें छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में लखनऊ और फैज़ाबाद कोर्ट परिसर में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद यूपी एटीएस की टीम ने बाराबंकी रेलवे स्टेशन से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया। आतंकियों ने अपना नाम तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद निवासी आजमगढ़ बताया था।
मिले थे भारी मात्रा में विस्फोटक
एटीएस के मुताबिक, इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक भी बरामद किए गए थे। दोनों आतंकियों ने स्वीकार किया था कि उन्होंने इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों के साथ मिलकर गोरखपुर में भी सीरियल ब्लास्ट की घटना को अंजाम दिया था। तारिक सहित अन्य आरोपी आतंकियों के खिलाफ गोरखपुर के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
दरियाबाद में चल रहे इज्तेमे में हड़कम्प
जमतिओ का इज्तेमा ज़िले के ऐतिहासिक कसबे दरियाबाद में चल रहा हैं,इसी दौरान आज इस फैसले ने हिला दिया,कैन जमतिउलेमा नेता सरकार को कोसते नज़र आये,सपा सरकार ने चुनाव में मुकदमा वापस लेने की बात कही थे,खालिद मुजाहिद की मौत के बाद इस मामले ने ज़ोर पकड़ा सपा सरकार ने मुकदमा वापसी का एलान किया बाद में हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया,वही खालिद की मौत के बाद डी जी पी समेत कई पुलिस कर्मिओ पर मुकदमा भी दर्ज हुआ,लेकिन बाद में फाइनल लगा दिया गया था ,

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